उपाध्यायबीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
महात्मा गांधी के पोते को इस भाषण का पता चला
माना जाता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन में शायद दो ही बार अंग्रेज़ी में भाषण दिया था.
पहला 1930 में धार्मिक मामलों से जुड़ा एक भाषण और दूसरा उनकी मौत से कुछ ही महीने पहले 2 अप्रैल 1947 में दिया गया भाषण.
ज़्यादातर लोगों को यही पता था कि इस भाषण की रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी लेकिन अब उस भाषण की रिकॉर्डिंग अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में मिली है. लगभग साठ सालों के बाद.
बापू के इस भाषण की रिकॉर्डिंग चार एलपी रिकॉर्ड्स में मौजूद है और इसे साठ सालों तक सहेज कर रखनेवाले हैं वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जॉन क्रॉसगोव.
और जॉन क्रॉसगोव को ये रिकॉर्डिंग मिली पत्रकार ऑल्फ़्रेड वैग से जिन्होंने 1947 में इस भाषण को रिकॉर्ड किया था.
अचानक मिली रिकॉर्डिंग
लेकिन साठ सालों तक इस बारे में किसी और को पता नहीं था और ये बात सामने तब आई जब अप्रैल में महात्मा गांधी के पोते और उनकी जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी वाशिंगटन आए थे और उनकी मुलाक़ात क्रॉसगोव से हुई.
और तब जाकर क्रॉसगोव को भी अदाज़ा लगा कि ये रिकॉर्डिंग कितनी अनमोल है क्योंकि अंग्रेज़ी में उनका बस एक और भाषण उनकी आवाज़ में उपलब्ध था.
इस संबंध में सबसे पहले ख़बर देने वाले वाशिंगटन पोस्ट अख़बार ने राजमोहन गांधी के हवाले से कहा है कि ये बापू की ही आवाज़ है और ये भाषण एशिया के बड़े नेताओं के एक सम्मेलन में दिया गया था.
वैसे रिचर्ड ऐटनबरो की फ़िल्म गांधी देखकर बहुत लोगों को अंदाज़ा रहा है कि गांधी अपने भाषण अंग्रेज़ी में देते थे लेकिन राजमोहन गांधी ने बताया कि वो ज़्यादातर हिंदी या गुजराती में ही भाषण देते थे.
मैं आपकी तालियाँ नहीं आपके दिलों को जीतना चाहता हूँ और अगर जो मैं कह रहा हूँ उस पर आप सब के दिल एकसाथ ताली बजाएँ तो शायद मेरा काम पूरा होगा."
महात्मा गांधी
उनका पहला अंग्रेज़ी भाषण 1930 में इंग्लैंड में रिकॉर्ड हुआ था.
राजमोहन गांधी ने ये भी बताया है कि बापू के बहुत कम भाषणों की रिकॉर्डिंग हुई है क्योंकि एक तो वो अँग्रेज़ शासन के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे, दूसरा उस समय टेक्नॉलॉजी भी नहीं थी कि आसानी से रिकॉर्डिंग की जा सके.
इस भाषण की एक और ख़ास बात है कि ये गांधी के उस प्रस्ताव के ठीक एक दिन बाद दिया गया था जिसमें उन्होंने भारत को बंटवारे से बचाने के लिए मुहम्मद अली जिन्ना को पूरे देश का प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश की थी.
इस भाषण में उन्होंने देश में चल रहे दंगों की बात की है और सुनने वाले नेताओं से कहा है कि वो ये छवि लेकर नहीं बल्कि शांति का संदेश लेकर भारत से लौटें.
एक बार जब लोगों ने तालियाँ बजानी शुरू कीं, तो उन्होंने बीच में ही उन्हें यह कहकर रोका कि 'इससे मेरा भाषण भी रूकेगा और आपके समझने में भी मुश्किल आएगी.'
उन्होंने कहा, "मैं आपकी तालियाँ नहीं आपके दिलों को जीतना चाहता हूँ और अगर जो मैं कह रहा हूँ उस पर आप सब के दिल एकसाथ ताली बजाएँ तो शायद मेरा काम पूरा होगा."
राजमोहन गांधी ने इस भाषण को एक अनूठे खोज का नाम दिया है और आज इंटरनेट के ज़माने में ये खोज बापू के संदेश को बड़ी आसानी से जीवंत कर रही है और वह भी दुनिया के हर कोने में.
बापू को अनूठी श्रद्धांजलिलंदन में संवादों के माध्यम से गांधी जी के जीवन के अंतिम दिन का मंचन हुआ.
महात्मा के अंतिम शब्दमहात्मा गांधी ने अंतिम सांस लेते वक्त 'हे राम' कहा था या कुछ और...
सर्वश्रेष्ठ अंपायर कौनक्या आप जानना चाहेंगे एक मशहूर कलाकार किसे सर्वश्रेष्ठ अंपायर बता रहा है.
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भारत के लिए करो या मरो की स्थिति
गांधी के भाषण की दुर्लभ रिकॉर्डिंग
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ज़्यादातर लोगों को यही पता था कि इस भाषण की रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी लेकिन अब उस भाषण की रिकॉर्डिंग अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में मिली है. लगभग साठ सालों के बाद.
बापू के इस भाषण की रिकॉर्डिंग चार एलपी रिकॉर्ड्स में मौजूद है और इसे साठ सालों तक सहेज कर रखनेवाले हैं वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जॉन क्रॉसगोव.
और जॉन क्रॉसगोव को ये रिकॉर्डिंग मिली पत्रकार ऑल्फ़्रेड वैग से जिन्होंने 1947 में इस भाषण को रिकॉर्ड किया था.
अचानक मिली रिकॉर्डिंग
लेकिन साठ सालों तक इस बारे में किसी और को पता नहीं था और ये बात सामने तब आई जब अप्रैल में महात्मा गांधी के पोते और उनकी जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी वाशिंगटन आए थे और उनकी मुलाक़ात क्रॉसगोव से हुई.
और तब जाकर क्रॉसगोव को भी अदाज़ा लगा कि ये रिकॉर्डिंग कितनी अनमोल है क्योंकि अंग्रेज़ी में उनका बस एक और भाषण उनकी आवाज़ में उपलब्ध था.
इस संबंध में सबसे पहले ख़बर देने वाले वाशिंगटन पोस्ट अख़बार ने राजमोहन गांधी के हवाले से कहा है कि ये बापू की ही आवाज़ है और ये भाषण एशिया के बड़े नेताओं के एक सम्मेलन में दिया गया था.
वैसे रिचर्ड ऐटनबरो की फ़िल्म गांधी देखकर बहुत लोगों को अंदाज़ा रहा है कि गांधी अपने भाषण अंग्रेज़ी में देते थे लेकिन राजमोहन गांधी ने बताया कि वो ज़्यादातर हिंदी या गुजराती में ही भाषण देते थे.
मैं आपकी तालियाँ नहीं आपके दिलों को जीतना चाहता हूँ और अगर जो मैं कह रहा हूँ उस पर आप सब के दिल एकसाथ ताली बजाएँ तो शायद मेरा काम पूरा होगा."
महात्मा गांधी
उनका पहला अंग्रेज़ी भाषण 1930 में इंग्लैंड में रिकॉर्ड हुआ था.
राजमोहन गांधी ने ये भी बताया है कि बापू के बहुत कम भाषणों की रिकॉर्डिंग हुई है क्योंकि एक तो वो अँग्रेज़ शासन के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे, दूसरा उस समय टेक्नॉलॉजी भी नहीं थी कि आसानी से रिकॉर्डिंग की जा सके.
इस भाषण की एक और ख़ास बात है कि ये गांधी के उस प्रस्ताव के ठीक एक दिन बाद दिया गया था जिसमें उन्होंने भारत को बंटवारे से बचाने के लिए मुहम्मद अली जिन्ना को पूरे देश का प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश की थी.
इस भाषण में उन्होंने देश में चल रहे दंगों की बात की है और सुनने वाले नेताओं से कहा है कि वो ये छवि लेकर नहीं बल्कि शांति का संदेश लेकर भारत से लौटें.
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राजमोहन गांधी ने इस भाषण को एक अनूठे खोज का नाम दिया है और आज इंटरनेट के ज़माने में ये खोज बापू के संदेश को बड़ी आसानी से जीवंत कर रही है और वह भी दुनिया के हर कोने में.
बापू को अनूठी श्रद्धांजलिलंदन में संवादों के माध्यम से गांधी जी के जीवन के अंतिम दिन का मंचन हुआ.
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Thursday, July 3, 2008
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